इतिहास से हम क्या सीखते हैं? यही न, यही तो कारण है इतिहास की महत्वपूर्णता हम इतिहास इसीलिए पढ़ते है ताकि वो गलतियां न दोहराये जो पहले हो गयी थी लेकिन हमने इतिहास से कुछ नहीं सीखा है। इतिहास दरअसल खुद को नहीं दोहराता बल्कि गलतियों का इतिहास स्वयं को दोहराता है। एक अनुभव इसलिए होता है ताकि उससे हम कुछ सीखे और यदि हम उससे वह सीखने में असमर्थ हो जाते हैं तो फिर वापस वही गलतियां करते है जो पहले की थी जिसका परिणाम भी उसी इतिहास का दोहराव होता है । 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 तक का 21 महीने की अवधि में भारत में आपातकाल घोषित था। तत्कालीन राष्ट्रपति फ़ख़रुद्दीन अली अहमद ने तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी के कहने पर भारतीय संविधान की अनुच्छेद 352 के अधीन आपातकाल की घोषणा कर दी। मीसा कानून साल 1971 में लागू किया गया था लेकिन इसका इस्तेमाल आपातकाल के दौरान कांग्रेस विरोधियों, पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को जेल में डालने के लिए किया गया. केंद्र में सत्ताधारी दल बीजेपी आपातकाल के बहाने विपक्षी दल कांग्रेस को घेरने में लगी है. जून 1975 में लगाया गया आपातकाल शायद कांग्रेस की सबसे बड़...
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Showing posts from February, 2023
मेयर चुनाव दिल्ली 2023
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मेयर चुनाव दिल्ली 2023 नगर निगम चुनाव के नतीजे पिछले साल 7 दिसम्बर 2022 को आए थे। जिसमें 250 वार्डों में से 134 में आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी जीते जबकि बीजेपी को 104 सीटों पर जीत मिली हैं। कांग्रेस के 8 पार्षदों सीटों पर जीत मिली हैं। जबकि एक निर्दलीय जीता। दिल्ली नगर निगम अधिनियम के मुताबिक पहले साल महिला मेयर होना अनिवार्य है। पहले एक साल के लिए मेयर का पद महिला पार्षद के लिए आरक्षित किया गया है। ऐसे में जिस भी पार्टी का मेयर बनेगा, वो एक महिला ही होग। इसके अलावा ये भी पहले से ही नियम है कि तीसरे साल अनुसूचित जाति का मेयर होगा। वहीं अन्य 3 सालों के लिए मेयर का पद अनारक्षित है। इसमें कोई भी पार्षद मेयर का चुनाव लड़ सकता है। आखिरी बार 2011 में जब एकीकृत एमसीडी थी, तो मेयर बीजेपी की रजनी अब्बी थी। इसके बाद 6 जनवरी, 24 जनवरी और 6 फरवरी को निगम बैठकों में हंगामे के कारण चुनाव नहीं हो सका। 22 फरवरी की चौथी बैठक में मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव के दौरान हंगामा नहीं हुआ और मतदान की प्रक्रिया पूरी कर ली गई। कांग्रेस ने चुनाव में हिस्सा नहीं लिया। बुधवार को मतदान में आम आदमी पार्टी की प...
सभी काम होंगे मेरे जाने के बाद
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सभी काम होंगे मेरे जाने के बाद तुम खुश भी होगे दुखी भी होगे पर कारण मैं नहीं होऊगा मेरे जाने के बाद सभी काम होंगे मेरे जाने के बाद यदि जरा भी दिल दुखाया है मैंने आपका तो अपने आश्क का एक भी कचरा मत गिरने देना फिर से एक बार दुखी होओ मैं नहीं चाहूंगा मेरे जाने के बाद सभी काम होंगे मेरे जाने के बाद। हो सकता है मैं फेमस हो जाऊं लोगों के लिए श मसीहा बन जाऊं शायद अपनों के लिए कुछ कर भी न पाऊं मेरे अपने तुम कभी दुखी मत होना मेरे जाने के बाद सभी काम होंगे मेरे जाने के बाद
सुंदर कविता
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तीन पहर तो बीत गये, बस एक पहर ही बाकी है। जीवन हाथों से फिसल गया, बस खाली मुट्ठी बाकी है। सब कुछ पाया इस जीवन में, फिर भी इच्छाएं बाकी हैं। दुनिया से हमने क्या पाया, यह लेखा-जोखा बहुत हुआ, * इस जग ने हमसे क्या पाया, बस ये गणनाएं बाकी हैं। * इस भाग-दौड़ की दुनिया में हमको, इक पल का होश नहीं, वैसे तो जीवन सुखमय है, पर फिर भी क्यों संतोष नहीं ! क्या यूं ही जीवन बीतेगा, क्या यूं ही सांसें बंद होंगी ? औरों की पीड़ा देख समझ कब अपनी आंखें नम होंगी ? मन के अंतर में कहीं छिपे इस प्रश्न का उत्तर बाकी है। मेरी खुशियां, मेरे सपने मेरे बच्चे, मेरे अपने यह करते-करते शाम हुई इससे पहले तम छा जाए, इससे पहले कि शाम ढले कुछ दूर परायी बस्ती में इक दीप जलाना बाकी है। तीन पहर तो बीत गये, बस एक पहर ही बाकी है। जीवन हाथों से फिसल गया, बस खाली मुट्ठी बाकी है।
माता-पिता - गुरू
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*🙇♀️माता-पिता - गुरू🙇♂️* *किसी ने मुझसे पूछा.??* दुनिया में *सबसे मुश्किल काम क्या है??* *"बड़ा कठिन सवाल है"* मैने मुस्करा कर कहा! फिर कुछ सोचकर मैंने कहा.... *मेरी नजर में दुनिया का सबसे मुश्किल काम है....* 1) अपनी आंखों के सामने माता -पिता ,गुरू को...*बूढ़ा होते हुए देखना..!!* ये वो समय होता है *जब हम* *विधाता के इस लिखे को टाल* *नहीं पाते..!!* माता-पिता के वो खूबसूरत से चेहरे जब झुर्रियों से भर जाते हैं तो....दिल भर आता है..!! 2) *उंगली पकड़कर चलाने वाले जब खुद चल नहीं पाते तो....दिल भर आता है..!!* *सहारा देने वाले* जब खुद *सहारे की तलाश में घूमते हैं* तो....दिल भर आता है..!! 3) *रास्ता दिखाने वालों को जब अपने ही रास्ते वीरान नजर आते हैं तो....दिल भर आता है..!!* 4) *हंसकर बोलने वाले* जब खामोश रहने लगते हैं तो....दिल भर आता है..!! 5) *अपने बच्चों की नजर उतारने वालों की जब नजरे धुंधला जाती हैं तो*....दिल भर आता है..!! *अगर ईश्वर मुझे कुछ मांगने के लिए कहे तो मैं ये मांगू.....* हे ईश्वर ... *किसी के भी माता-पिता , गुरू को कमजोर..बीमार लाचार...
ब्राह्मणों ने जातियाँ बनाई नही है।
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*वैसे तो ब्राह्मणों ने जातियाँ बनाई नही है।* *ये खुद समय के साथ अपने आप बन गई है।* *लेकिन* *मान लिया कि उन्होंने ही बनाई है तो फायदा किसका हुआ?* *पहले के जमाने मे कमाने खाने के लिए सरकारी नौकरी तो होती नही थी।* *ब्राह्मणों ने पूरा फर्नीचर व्यवसाय बढ़ई को दिया।* *रियल सेक्टर कुम्हार को दिया।* *लेदर का व्यवसाय चर्मकार को दिया।* *डिलीवरी का व्यवसाय भी चर्मकार को दिया ।* *दूध का व्यवसाय यादव को दिया।* *टेक्सटाइल का दर्जी को दिया।* *हथियार का व्यवसाय लुहार को दिया।* *बर्तन का ठठेरे को दिया।* *पत्तल का बारी को दिया।* *सूप का धरिकार को दिया।* *चूड़ी व्यवसाय मलिहार को दिया।* *मीट का खटीक को दिया।* *फूल का माली को दिया।* *तेल का व्यवसाय तेली को दिया।* *जिससे सबको रोजगार मिला।* *इन सारे सम्मानित व्यवसाइयों को आज संविधान ने पिछड़ा अछूत बना दिया है।* *क्षत्रियों को वो काम दिया जिससे जवानी में औरतें विधवा और बच्चे अनाथ हो जाते हैं।* *जो कोई भी नही करना चाहेगा अपने लिए भिक्षा माँगना और अध्यापन रखा* *आखिर सब व्यवसाय जिससे भारत पूरी दुनिया मे सोने की चिड़िया था।* *ब्राह्...
पता नहीं क्यों पिताजी हमेशा पिछड़ रहे हैं।
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*🤔🤔🤔🤔 पता नहीं क्यों पिताजी हमेशा पिछड़ रहे हैं।🤔* (1) 🙏माँ की तपस्या 9 महीने की होती है! पिताजी की तपस्या 25 साल तक होती हैं, दोनों बराबर हैं, मगर फिर भी पता नहीं क्यों पिताजी पिछड़ रहे हैं।🤔 (2)🙏माँ परिवार के लिए भुगतान किए बिना काम करती है, पिताजी भी अपना सारा वेतन परिवार के लिए ही खर्च करते हैं, उनके दोनों के प्रयास बराबर हैं, फिर भी पता नहीं क्यों पिताजी पिछड़ रहे हैं।🤔 (3)🙏माँ आपको जो चाहे पकाती है, पिताजी भी आप जो भी चाहते हैं, खरीद देते हैं, प्यार दोनों का बराबर है, लेकिन माँ का प्यार बेहतर है। पता नहीं क्यों पिताजी पिछड़ रहे हैं।🤔 ( 4) 🙏जब आप फोन पर बात करते हैं, तो आप पहले मॉ से बात करना चाहते हैं, अगर आपको कोई चोट लगी है, तो आप 'मॉ' का रोना रोते हैं। आपको केवल पिताजी की याद होगी जब आपको उनकी आवश्यकता होगी, लेकिन पिताजी को कभी बुरा नहीं लगता कि आप उन्हें सदैव और हर बार याद नहीं करते? जब पीढ़ियों के लिए बच्चों से प्यार प्राप्त करने की बात आती है, तो कोई यह नहीं जानता कि पिताजी क्यों पिछड़ रहे हैं।🤔 (5)🙏अलमारी बच्चों के लिए रंगीन कपड़ो व स...
पागल बाबा मंदिर वृंदावन
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यहां अपने भक्त के लिए खुद गवाही देने चले आए थे बांके बिहारी सफेद संगमरमर से नौ मंजिल बना है पागल बाबा मंदिर, आकर्षित करती है सुंदरता यह तो सभी जानते हैं कि उत्तर प्रदेश में स्थित मथुरा को ‘कृष्ण की नगरी’ और 'मंदिरों की नगरी' के नाम से जाना जाता है। इसे मंदिरों की नगरी क्यों कहा जाता है तो हम बता दें कि इस नगरी के बारे में कहावत प्रसिद्ध है कि यहां कहीं भी एक पत्थर उछालों तो वो किसी ना किसी मंदिर में ही गिरेगा इसलिए तो इस नगरी को 'मंदिरों की नगरी' भी कहा जाता है। यहां एक नहीं बल्कि ऐसे अनेक मंदिर हैं जहां दर्शन करने के लिए हजारों लोगों की पंक्तियां लगी रहती है। मथुरा के पास ही स्थित वृंदावन नगरी में, सब मंदिरों में से एक मंदिर बहुत ज्यादा खास है और इस मंदिर का नाम है ‘पागल बाबा मंदिर’। जिसका निर्माण आधुनिक वास्तुकला के रूप में ‘पागल बाबा’ द्वारा कराया गया था। मथुरा मार्ग स्थित संत श्रीमद्लीलानंद ठाकुर-पागल बाबा आश्रम किसी चमत्कारी स्थल से कम नहीं हैं। उन्होंने हरिनाम के प्रभाव में पांच आश्रमों की स्थापना की अस्पताल बनवाए। इनमें दो आश्रम वृंदावन में हैं। सभी...