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Showing posts from March, 2023

काशी या वाराणसी

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काशी या वाराणसी बौद्ध-जैन ग्रंथों में उल्लेख प्राचीन बौद्ध ग्रंथों से पता चलता है कि वाराणसी बुद्ध काल (कम-से-कम पांचवीं ईसा पूर्व शताब्दी) में चम्पा, राजगृह, श्रावस्ती, साकेत एवं कौशाम्बी जैसे महान एवं प्रसिद्ध नगरों में गिनी जाती थी। विश्व में ऐसा कोई नगर नहीं है, जो वाराणसी से बढ़कर प्राचीनता, निरंतरता और मोहक आदर का पात्र हो । 3 हजार वर्ष से यह पवित्रता ग्रहण करता आ रहा है। इस नगर के कई नाम रहे हैं जैसे- वाराणसी, अविमुक्त एवं काशी। अपनी महान जटिलताओं एवं विरोधों के कारण यह नगर सभी युगों में भारतीय जीवन का एक सूक्ष्म स्वरूप रहता आया है। वाराणसी या काशी के विषय में महाकाव्यों एवं पुराणों में हजारों श्लोक कहे गए हैं। उस समय यह नगर आर्यों की लीलाओं का केंद्र बन चुका था। प्राचीन जैन ग्रंथों में भी वाराणसी एवं काशी का उल्लेख हुआ है। अश्वघोष ने अपने 'बुद्धचरित' में वाराणसी एवं काशी को एक- सा कहा है। वहां लिखा है कि बुद्ध ने वाराणसी में प्रवेश करके अपने प्रकाश से नगर को प्रकाशित करते हुए काशी के निवासियों के मन में कौतुक भर दिया। पौराणिक एवं शास्त्रीय मान्यता हरिवंश पुर...
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लोलार्क कुंड लोलार्क कुण्ड उत्तर प्रदेश के प्राचीन नगर बनारस में तुलसीघाट के निकट स्थित एक कुण्ड है। मान्यता अनुसार यह अति प्राचीन है तथा इस कुण्ड का उल्लेख महाभारत में भी मिलता है। कालान्तर में इन्दौर की रानी अहिल्‍याबाई होल्‍कर ने इस कुण्‍ड के चारों तरफ कीमती पत्‍थर से सजावट करवाई थी। इसी के समीप लोलाकेश्‍वर का मंदिर है। भादो महीने (अगस्‍त-सितम्‍बर) में यहां लक्खा मेला लगता है और तब काशी के इस लोलार्क कुंड में डुबकी लगाने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ती है। अस्सी के भैदानी स्थित प्रसिद्ध लोलार्क कुंड पर हर साल लाखों श्रद्धालुओं का मेला लगता है। लक्खा मेले में लोलार्क पष्ठी या सूर्य षष्ठी स्नान की बड़ी मान्याता है, और कहते हैं कि महादेव लोलार्केश्वर संतान प्राप्ति की कामना वाले दंपतियों की मनोकामना पूरी कर देते हैं। [1] लोलार्क कुंड में स्नान करने के लिए अलग-अलग क्षेत्रों से श्रद्धालुओं की यहां भीड़ जुटती है। लोलार्क कुंड लोलार्क कुण्ड का ऊपर से दृश्य  लोलार्क कुंड लोलार्क कुंड is located in उत्तर प्रदेश स्थान वाराणसी, उत्तर प्रदेश निर्देशांक 25°17′27.96″N...

तुलसीदास जी का जीवन परिचय

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तुलसीदास जी का जीवन परिचय | Biography of Tulsidas in Hindi By Shubham Sirohi-02537 गोस्वामी तुलसीदास का जीवन परिचय ,गोस्वामी तुलसीदास के दोहे एवं जयंती ( Tulsi Das Biography in hindi ,Tulsi Das ke Dohe and Jayanti With Hindi Meaning ) तुलसीदास (गोस्वामी तुलसीदास ) एक हिंदू संत कवि, धर्म सुधारक और दार्शनिक थे। वह रामानंद की गुरु परंपरा में रामानंदी समुदाय के थे । तुलसीदास जन्म से एक सरयूपरिणा ब्राह्मण थे और उन्हें वाल्मीकि का अवतार माना जाता है, जिन्होंने संस्कृत में रामायण की रचना की थी।   वे अपनी मृत्यु तक वाराणसी में रहे। उनके नाम पर तुलसी घाट का नाम रखा गया है। वह हिंदी साहित्य के सबसे महान कवि थे और उन्होंने संकट मोचन मंदिर की स्थापना की । गोस्वामी तुलसीदास एक महान हिंदू कवि होने के साथ-साथ संत, सुधारक और दार्शनिक थे जिन्होंने विभिन्न लोकप्रिय पुस्तकों की रचना की।  उन्हें भगवान राम के प्रति उनकी भक्ति और महान महाकाव्य, रामचरितमानस के लेखक होने के लिए भी याद किया जाता है।  उन्हें हमेशा वाल्मीकि (संस्कृत में रामायण के मूल संगीतकार और हनुमान चालीसा) के अवतार के र...

तुलसी मानस मंदिर काशी

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तुलसी मानस मंदिर पवित्र शहर वाराणसी में सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है तुलसी मानस मंदिर । यह मंदिर भारत का महान ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व दर्शाता है क्योंकि प्राचीन और जनमानस में रचा बसा हिंदू महाकाव्य, रामचरितमानस मूल रूप से 16 वीं शताब्दी  (1532-1623) में संत-कवि, समाज सुधारक और दार्शनिक श्रद्धेय श्री गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा इसी स्थान पर लिखा गया था। ऐसा माना जाता है कि 1964 में, सुरेका परिवार ने उसी स्थान पर एक मंदिर का निर्माण किया, जहां गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरितमानस लिखा था। यह स्थान वर्तमान में दुर्गा कुंड , भेलूपुर , वाराणसी, उतार प्रदेश के नाम से जाना जाता है। विश्व में अपनी अनोखी छवि रखने वाला यह तुलसी मानस मंदिर दुर्गा कुंड से 250 मीटर दक्षिण, वाराणसी कैन्ट से लगभग पाँच किलोमीटर, संकट मोचन मंदिर से 700 मीटर उत्तर-पूर्व और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से 1.3 किलोमीटर उत्तर में संकट मोचन मंदिर रोड पर स्थित है । इतिहास यह सर्वविदित है कि रामायण मूल रूप से तुलसीदास जी से भी सैकड़ों वर्ष पूर्व संस्कृत कवि वाल्मीकि द्वारा संस्कृत भाषा में लिखी गई थी । गोस...

पुष्कर में ब्रह्मा जी का एकमात्र मंदिर क्यों है?

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पुष्कर में ब्रह्मा जी का एकमात्र मंदिर क्यों है? सनातन धर्म में त्रिमूर्ति के रूप में बह्मा, विष्णु और महेश की पूजा होती है। मान्यता है कि ब्रह्मा सृष्टि के रचयिता, विष्णु संरक्षक और शिव संहारक हैं यानी तीनों का व्यापक महत्व है। भगवान विष्णु और शिव के लाखों मंदिर देश-दुनिया में हैं, लेकिन ब्रह्मा का सिर्फ एक मंदिर है, पुष्कर में। यह सवाल उठना लाजमी है कि ऐसा क्यों? ब्रह्मा हैं कौन ब्रह्मा सनातन धर्म के तीन प्रमुख देवताओं- ब्रह्मा, विष्णु और महेश में से एक हैं। उनको सृष्टि के रचयिता और वेद ज्ञान के प्रचारक के रूप में जाना जाता है। भागवत पुराण के अनुसार, जिस क्षण समय और ब्रह्मांड का जन्म हुआ था, उसी क्षण ब्रह्मा, हरि की नाभि से निकले एक कमल के पुष्प से उभरे। ब्रह्मा के चार मुख और चार भुजाएं हैं। प्रत्येक भुजा में है एक-एक वेद व्यास लिखित पुराणों में ब्रह्मा का वर्णन है। इस पुराण के अनुसार, ब्रह्मा के 5 मुख थे। लेकिन, पांचवां मुख भगवान शंकर ने क्रोध में आकर काट दिया। यह कहानी भी हम आगे बताएंगे। ब्रह्मा ने अपने आधे अंग से मनु और आधे अंग से शतरूपा को उत्पन्न किया, जो सृष्टि के आ...