तुलसी मानस मंदिर काशी
तुलसी मानस मंदिर
पवित्र शहर वाराणसी में सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है तुलसी मानस मंदिर । यह मंदिर भारत का महान ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व दर्शाता है क्योंकि प्राचीन और जनमानस में रचा बसा हिंदू महाकाव्य, रामचरितमानस मूल रूप से 16 वीं शताब्दी (1532-1623) में संत-कवि, समाज सुधारक और दार्शनिक श्रद्धेय श्री गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा इसी स्थान पर लिखा गया था। ऐसा माना जाता है कि 1964 में, सुरेका परिवार ने उसी स्थान पर एक मंदिर का निर्माण किया, जहां गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरितमानस लिखा था। यह स्थान वर्तमान में दुर्गा कुंड , भेलूपुर , वाराणसी, उतार प्रदेश के नाम से जाना जाता है।
विश्व में अपनी अनोखी छवि रखने वाला यह तुलसी मानस मंदिर दुर्गा कुंड से 250 मीटर दक्षिण, वाराणसी कैन्ट से लगभग पाँच किलोमीटर, संकट मोचन मंदिर से 700 मीटर उत्तर-पूर्व और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से 1.3 किलोमीटर उत्तर में संकट मोचन मंदिर रोड पर स्थित है ।
इतिहास
यह सर्वविदित है कि रामायण मूल रूप से तुलसीदास जी से भी सैकड़ों वर्ष पूर्व संस्कृत कवि वाल्मीकि द्वारा संस्कृत भाषा में लिखी गई थी । गोस्वामी तुलसीदास जी के काल में, संस्कृत भाषा में होने के कारण, यह महाकाव्य जनता के लिए सुलभ और समझने योग्य नहीं था। 16वीं शताब्दी में, गोस्वामी तुलसीदास ने रामायण को हिंदी भाषा की अवधी बोली में लिखा रामचरित मानस महा ग्रंथ की रचना की और अवधी संस्करण को रामचरितमानस (अर्थात् राम के कर्मों की झील) कहा गया था । लोगों को आप ऐसा कहते हुए भी सुन सकते हैं कि रामचरितमानस से पहले, भगवान राम को एक महान राजा के रूप में चित्रित किया गया था और रामचरितमानस ने उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम राम जैस देवता के रूप में प्रतिष्ठित किया।
निर्माण
तुलसी मानस मंदिर का निर्माण 1964 में समाप्त हुआ और बंधाघाट, हावड़ा , पश्चिम बंगाल के ठाकुर दास सुरेका परिवार द्वारा वित्त पोषित किया गया। 85 मीटर (279 फीट) ऊंचाई वाला यह मंदिर 2 मंजिला है जिसमें नीचे तीन विग्रह तथा इसके दूसरी मंजिल पर संत तुलसी दास जी विराजमान और चलचित्र प्रदर्शनी प्रदर्शित की गई है। मंदिर का उद्घाटन भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति परम पूज्य डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन द्वारा किया गया था। इस मंदिर में पांडुलिपियों और कलाकृतियों के दुर्लभ संग्रह के साथ एक संग्रहालय है।
इस मन्दिर के मध्य मे श्री राम, माता जानकी, लक्ष्मणजी एवं हनुमानजी विराजमान है। इनके एक ओर माता अन्नपूर्णा एवं शिवजी तथा दूसरी तरफ सत्यनारायणजी का मन्दिर है। मंदिर का निर्माण सफेद संगमरमर से किया गया था और मंदिर के चारों ओर भूनिर्माण किया गया था । रामचरितमानस के छंद और दृश्य (चित्र ) पूरे मंदिर में संगमरमर की दीवारों पर उकेरे गए हैं।
इस मन्दिर के चारो तरफ बहुत सुहावना घास (लान) एवं रंगीन फुहारा है, जो बहुत ही मनमोहक है।
मंदिर के खुलने का समय है : सुबह 5:30 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक और दोपहर 3:30 बजे से रात 9:00 बजे तक।
Comments
Post a Comment