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Showing posts from May, 2023

काशी

बौद्ध-जैन ग्रंथों में लेख प्राचीन बौद्ध ग्रंथों से पता चलता है कि वाराणसी बुद्ध काल (कम-से-कम पांचवीं ईसा पूर्व शताब्दी) में चम्पा, राजश्रवस्ती साकेत एवं कौशाम्बी नगरों में गिनी जाती महान एवं प्रसिद्ध में ऐसा कोई नगर नहीं है, जो वाराणस्त से बढ़कर प्राचीनता, निरंतरता और मोहक आदर का पात्र हो। 3 हजार वर्ष से यह पवित्रता ग्रहण करता आ रहा है। इस नगर के कई नाम रहे हैं जैसे- वाराणसी, अविमुक्त एवं काशी। अपनी महान जटिलताओं एवं विरोधों के कारण यह नगर सभी युगों में भारतीय जीवन का एक सूक्ष्म स्वरूप रहता आया है। वाराणसी या काशी के विषय में महाकाव्यों एवं पुराणों में हजारों श्लोक कहे गए हैं। उस समय यह नगर आय की लीलाओं का केंद्र बन चुका था। प्राचीन जैन ग्रंथों में भी वाराणसी एवं काशी का हुआ है। अश्वघोष ने अपने 'बुद्धचरित' में वाराणसी एवं काशी को एक- सा कहा है। यहां लिखा है कि बुद्ध ने वाराणसी में प्रवेश करके अपने प्रकाश से नगर को प्रकाशित करते हुए काशी के निवासियों के मन में कौतुक भर दिया। पौराणिक एवं शास्त्रीय मान्यता हरिवंश पुराण के अनुसार काशी को बसाने वाले भरतवंशी राजा 'काश' थे। स...

नरक मंदिर थाईलैंड

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यहां है विश्व का इकलौता नर्क मंदिर, जहां पापों का प्रायश्चित करने आते हैं लोग शायद विश्व का यह इकलौता नरक मंदिर ( World's only Hell Temple ) है, विश्व का यह इकलौता नरक मंदिर है, जहां श्रद्धालु नरक के दर्शन करने आते हैं। नरक मंदिर थाईलैंड के चियांग माइ में है। थाईलैंड का नरक मंदिर सनातन धर्म और बौद्ध धर्म से प्रेरित विश्व का यह इकलौता नरक मंदिर है, जहां श्रद्धालु नरक के दर्शन करने आते हैं। इस मंदिर को यहां वैट मेई कैट नोई ( wat mae kaet noi ) मंदिर कहा जाता है। मान्यता है कि यहां जो भी दर्शन करने आता उसके पापों का प्रायश्चित हो जाता है। इस मंदिर की सभ्यता तथा संस्कृति पर भी काफी हद तक भारतीय प्रभाव देखा जा सकता है। चियांग माइ शहर में लगभग 300 मंदिर हैं, जो थाईलैंड की राजधानी बैंकाक से लगभग 700 किलोमीटर दूर है।  लेकिन यहां का नरक मंदिर अपने आप में न केवल अनूठा है बल्कि पूरी दुनिया का इकलौता मंदिर है। जहां लोग पापों का प्रायश्चित करने आते हैं।  जैसा कि नाम से ही विदित होता है कि यह मंदिर सिर्फ नाम से नहीं, बल्कि देखने में भी यह मंदिर नरक की तरह दिखाई देता है। इस मंदिर...