ब्राह्मणों ने जातियाँ बनाई नही है।
*वैसे तो ब्राह्मणों ने जातियाँ बनाई नही है।*
*ये खुद समय के साथ अपने आप बन गई है।*
*लेकिन*
*मान लिया कि उन्होंने ही बनाई है तो फायदा किसका हुआ?*
*पहले के जमाने मे कमाने खाने के लिए सरकारी नौकरी तो होती नही थी।*
*ब्राह्मणों ने पूरा फर्नीचर व्यवसाय बढ़ई को दिया।*
*रियल सेक्टर कुम्हार को दिया।*
*लेदर का व्यवसाय चर्मकार को दिया।*
*डिलीवरी का व्यवसाय भी चर्मकार को दिया ।*
*दूध का व्यवसाय यादव को दिया।*
*टेक्सटाइल का दर्जी को दिया।*
*हथियार का व्यवसाय लुहार को दिया।*
*बर्तन का ठठेरे को दिया।*
*पत्तल का बारी को दिया।*
*सूप का धरिकार को दिया।*
*चूड़ी व्यवसाय मलिहार को दिया।*
*मीट का खटीक को दिया।*
*फूल का माली को दिया।*
*तेल का व्यवसाय तेली को दिया।*
*जिससे सबको रोजगार मिला।*
*इन सारे सम्मानित व्यवसाइयों को आज संविधान ने पिछड़ा अछूत बना दिया है।*
*क्षत्रियों को वो काम दिया जिससे जवानी में औरतें विधवा और बच्चे अनाथ हो जाते हैं।*
*जो कोई भी नही करना चाहेगा अपने लिए भिक्षा माँगना और अध्यापन रखा*
*आखिर सब व्यवसाय जिससे भारत पूरी दुनिया मे सोने की चिड़िया था।*
*ब्राह्मणों ने क्षत्रियों के हिस्से में बलिदान दिया और स्वयं ब्राह्मणों के हिस्से में भिक्षाटन आया तो फिर उन्होंने जाति व्यवस्था में अन्याय कैसे किया?🚩
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