मेयर चुनाव दिल्ली 2023

मेयर चुनाव दिल्ली 2023

नगर निगम चुनाव के नतीजे पिछले साल 7 दिसम्बर 2022 को आए थे। जिसमें 250 वार्डों में से 134 में आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी जीते जबकि बीजेपी को 104 सीटों पर जीत मिली हैं। कांग्रेस के 8 पार्षदों सीटों पर जीत मिली हैं। जबकि एक निर्दलीय जीता।

दिल्ली नगर निगम अधिनियम के मुताबिक पहले साल महिला मेयर होना अनिवार्य है। पहले एक साल के लिए मेयर का पद महिला पार्षद के लिए आरक्षित किया गया है। ऐसे में जिस भी पार्टी का मेयर बनेगा, वो एक महिला ही होग। इसके अलावा ये भी पहले से ही नियम है कि तीसरे साल अनुसूचित जाति का मेयर होगा। वहीं अन्य 3 सालों के लिए मेयर का पद अनारक्षित है। इसमें कोई भी पार्षद मेयर का चुनाव लड़ सकता है। आखिरी बार 2011 में जब एकीकृत एमसीडी थी, तो मेयर बीजेपी की रजनी अब्बी थी।

 इसके बाद 6 जनवरी, 24 जनवरी और 6 फरवरी को निगम बैठकों में हंगामे के कारण चुनाव नहीं हो सका। 22 फरवरी की चौथी बैठक में मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव के दौरान हंगामा नहीं हुआ और मतदान की प्रक्रिया पूरी कर ली गई। कांग्रेस ने चुनाव में हिस्सा नहीं लिया। बुधवार को मतदान में आम आदमी पार्टी की प्रत्याशी डॉ. शैली ओबेरॉय महापौर और आम आदमी पार्टी के ही आले मोहम्मद उप महापौर चुने गए। भारतीय जनता पार्टी की तरफ से मेयर पद की उम्मीदवार पार्षद रेखा गुप्ता को और डिप्टी मेयर पद की प्रत्याशी कमल बागड़ी को हार का सामना करना पड़ा।

निगम एक्ट प्रावधान के अनुसार पांच साल की अवधि में पहले वर्ष मेयर का पद महिला के लिए आरक्षित होता है। पहला मेयर 31 मार्च तक रहता है। इसके बाद अप्रैल के लिए नया मेयर चुना जाता है। ऐसे में आप की डॉ. शैली 38 दिनों तक महापौर पद पर रहेंगी।

मेयर पद के लिए 274 में से कुल 266 वोट पड़े। कांग्रेस के 8 पार्षदों ने मतदान में भाग नहीं लिया। इस मतदान में चुने गए पार्षदों के साथ भाजपा और आप के 10 सांसद और 14 विधायक सदस्यों के वोट भी शामिल हैं। कुल वोटों में आम आदमी पार्टी की मेयर प्रत्याशी डॉ. शैली ओबेरॉय को 150 और भाजपा उम्मीदवार रेखा गुप्ता को 116 वोट मिले। भारतीय जनता पार्टी की तरफ से डिप्टी मेयर पद की प्रत्याशी कमल बागड़ी को हार का सामना करना पड़ा।

वित्तीय शक्तियां रखने वाली निगम अनुसा की सबसे शक्तिशाली स्थायी समिति के बंद के 6 सदस्यों का चुनाव भी इसी बैठक में कराया जाना था। महापौर चुनी गईं डॉ. शैली ने कुर्सी संभाली और चुनाव कराना शुरू किया। लेकिन, मतदान की प्रक्रिया के बीच हंगामा होने लगा। इस कारण बैठक कई बार स्थगित की गई। देर रात तक यह क्रम जारी रहा।


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