नागदाह जिसे अब #नागदा के नाम से जाना जाता है

महाकाल की नगरी उज्जैन का प्रवेशद्वार #नागदाह जिसे अब #नागदा के नाम से जाना जाता है। यहाँ अर्जुन के पौत्र राजा जन्मेजय ने अपने पिता परीक्षित की तक्षक सर्पदंश के कारण हुई मृत्यु का बदला लेने के लिए 'सर्पसत्र' नामक महान यज्ञ करके नागवंश का नाश किया था। #महाभारत आदिपर्व में इसका विस्तृत वर्णन मिलता है।

नागदाह के घनघोर यज्ञ की अग्नि से एक #कर्कोटक नामक सर्प ने अपनी जान बचाने के लिए उज्जैन में महाकाल की शरण ले ली थी जिसके चलते वह बच गया। माँ हरसिद्धि शक्तिपीठ परिसर में कर्कोटक ने घोर तपस्या की थी। वहाँ के दर्शन भी आपको कराएंगे।

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