रसों से करें ग्रहों को शांत

रसों से करें ग्रहों को शांत

ग्रह और नक्षत्रों का प्रभाव हमारे जीवन में सबसे पहले शरीर फिर मन पर पड़ता है, क्योंकि शरीर में नवग्रहों संबंधित सभी तत्व पाए जाते हैं। सभी ग्रह कुंडली के सार व्यक्ति के शरीर पर अच्छा और बुरा प्रभाव डालते आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि आप ग्रह नक्षत्रों अशुभ फलों को कुछ विशेष फल व सब्जियों के रसों जूसों के सेवन द्वारा उन ग्रहों के अशुभ प्रभाव को शुभ व में बदल सकते हैं। फलों और सब्जियों के अर्क सेवन करके अपने ग्रहों को शांत करके उनकी अनुकूलता सकते हैं परन्तु इनके सेवन से पूर्व अपनी कुंडली को मी अच्छे ज्योतिषाचार्य को अवश्य दिखा लें ताकि को पता चल सके कि आपको किस ग्रह की अनुकूलता न और किस ग्रह की प्रतिकूलता कम करने के लिए

फल और सब्जी के रसों का सेवन करना है। सूर्य: सूर्य, ग्रहों का राजा माना जाता है। उसका अनुकूल होना बहुत जरूरी है। यश, मान, सम्मान, हृदय, पिता का कारक ग्रह है सूर्य ।

रस : चुकंदर का रस, अनार का रस, टमाटर और आम का रस पीने से सूर्य की नकारात्मकता कम होती है तथा सूर्य का सकारात्मक प्रभाव मिलता है।

चंद्रमा: चंद्रमा को वैसे तो ग्रहों में रानी की संज्ञा दी जाती है परन्तु यह मन, सौंदर्य, मानसिक शांति, फेफड़ों एवं माता का कारक ग्रह है।

रस : लीची का रस, खरबूजे का रस, गन्ने का रस पीने से चंद्रमा का अशुभ प्रभाव दूर हो जाता है। चीनी को भी पानी में घोलकर पी सकते हैं। मंगल : मंगल को ग्रहों का सेनापति माना जाता

वीर ओज, तेज, शत्रु, भाई का कारक ग्रह है। ऋण, रोग, शत्रु का प्रदाता भी यही है।

रस : अनार का रस, चुकंदर का रस, टमाटर का रस पीने से मंगल का अशुभ प्रभाव कम हो जाता है। शहद को पानी में घोल कर पी सकते हैं।

बुध ग्रहों में राजकुमार की संज्ञा दी गई है बुध को जोकि सुकोमल ग्रह है। बुआ, मौसी, बहन, बुद्धि, वाणी, ज्ञान का कारक है।

रस : अमरूद का रस, नाशपाती का रस, हरे आंवलों का रस पीने से बुध की अशुभता दूर होती है। पालक का रस भी लाभकारी है।

गुरु ज्ञान का, धन का कारक है। गुरु ग्रह को देवताओं गुरु का पद मिला है। यह धन और यश का प्रदाता है। के

गुरु को भाग्य का कारक ग्रह भी कहते हैं। रसः केले का रस, पके पपीते का रस, संतरे का रस, नारंगी का रस पीने से गुरु की अशुभता दूर हो जाती है।

शुक्र : सौंदर्य, ऐश्वर्य, धन, सुख-सुविधाओं और पत्नी का कारक ग्रह है शुक्र। यह राक्षसों का गुरु होने के बाद भी बहुत विद्वान माना जाता है जो जीवन के सुख के लिए विशेष ग्रह है।

रस लीची का रस, गन्ने का रस, खरबूजे का रस । इससे शुक्र ग्रह की अशुभता दूर हो सकती है। चीनी का घोल व मूली, शलजम का रस भी लाभकारी होगा।

शनि-राहू-केतु : शनि, राहु, केतु ये तीनों ही छाया ग्रह हैं। इनकी अशुभता दूर करने के लिए काले अंगूर का रस, फालसे का रस एवं थलूचे का रस यानी जितने भी 'काले फल होते हैं उनके रसों का सेवन लाभकारी सिद्ध होता है।

-प्राची प्रवीन महेश्वरी

Comments

Popular posts from this blog

पागल बाबा मंदिर वृंदावन

अहिल्याबाई होल्कर जैसी शासिका का राजधर्म

वर्ष 2023 का अंतिम चंद्रग्रहण