भजन – लीला कर गयो है लिलिहारि


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उधव से बोल रही राधे
लीला कर गयो है लिलिहारि,
लीला कर गयो है लिलिहारि,
लीला कर गयो है लिलिहारि,

दृगन पै लिख गयो दीनदयाल
नासिका पै लिख गयो है नन्दलाल
कपोलन पै लिख गयो है गोपाल
माथे लिख गयो , मोहन लाल
श्रवनन पै लिख गयो है सांवरो, अधरन आनंदकंद,
ठोड़ी पै ठाकुर लिखो गयो है , गले में गोपीचन्द ।
छाती पै लिख गयो है छैल, 
बाँहन पै लिख गयो बनवारी ।
उधव से बोल रही राधे
लीला कर गयो है लिलिहारि,
लीला कर गयो है लिलिहारि,
लीला कर गयो है लिलिहारि,

हाथन पै हलधर जी को भईया ,
संग संग लिख आनंद-करैया
बीच-बीच में  बंसी बजैया
उंगरिन पै लिख गयो कन्हैया
पेट पै लिख गयो है परमानन्द
नाभि पै नन्दानन्द
पिण्डरी पै लिख गयो है घनश्याम
चित्त पै लिख गयो चितचोर
रोम-रोम में लिख गयो है राधे प्यारी।
कि उधव से बोल रही राधे
लीला कर गयो है लिलिहारि,
लीला कर गयो है लिलिहारि,
लीला कर गयो है लिलिहारि,

रोम-रोम में लिखो गयो है रमापति राधा बनवारी ।
द्वारका जाय द्वारकाधीश बन गयो है लिलिहारि,
लता जाने है पक्षी जाने है
कि खग मृग जाने है बाते सारी
कागा से यह कह रही है राधा बलिहारी
रे कागा, रे कागा, रे कागा, 
कागा सब तन खाइयो चुन चुन खाइयो मांस 
दो नैना मत खाइयो मोहे पिया मिलन की आस
मोहे श्याम मिलन की आश

कि उधव से बोल रही राधे
लीला कर गयो है लिलिहारि,
लीला कर गयो है लिलिहारि,
लीला कर गयो है लिलिहारि,




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